बुधवार, 10 सितंबर 2008

घर की यात्रा पार्ट-1

घर की यात्रा पार्ट-1

बहुत दिनों बाद ऑफिस से छुट्टी मिली थी। सोचा घर से हो आऊ काफी समय हो गया था पिछले दो सालों से घर जाने का मौका नहीं मिला। इस बीच बिहार से आने जाने वाले लोगों से सुनता रहा कि बिहार की तस्वीर बदल रहीहै ,अगर ऐसा ही रहा तो जल्द ही तक़दीर भी वदल जाएगी। लोगों की सुनी सुनाई बातों पर भरोसा प्रत्रकारों को नहीं करना चाहिए। सोचा खुद चल कर देखें की कितना बदल रहा है बिहार। पिछली बार जब घर गया था तो राज्य नीतीश कुमार के वायदे से गुंज रहा था। कुछ दिन पहले ही लालू प्रसाद की पत्नी के उत्तराधिकारी बने थे। बिहार की जनता ने त्रस्त होकर नीतीश को अपार समर्थन दिया था । सम्पूर्णक्रांति से चार घंटे देरी से पटना जंक्शन पहुंचा । पटना पहुंचते बारिश ने स्वागत किया। दिल्ली की भीषण गर्मी के बाद पटना की बारिश ने सुकून दिया। स्टेशन से निकलते ही सड़को पर नज़र डाली पुरानी और नई स्थिति में कुछ अधिक फर्क नहीं था। वहीं टूटी फूटी सड़के,सड़को में बारिश की पानी नीतीश कुमार के वायदो का माखौल उड़ा रही थी। बस से मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हुई। नजरें सड़को पर ही थी। वैसे भी पटना से मुजफ्फपुर तक की सड़के लालू के शासन काल में भी अपनी अस्तित्व बनाए रखी थी। कारण मंत्री -संतरी का उत्तरी बिहार में प्रवेश इसी रास्ते होती है ।मुजफ्फरपुर की सड़के स्थानीय विधायक की दया से हमेशा से अच्छी रही थी। पर इस बार शहर में प्रवेश करते हीं स्थिति भयावह लगी। सड़के लूटी -पीटी थी। शहर अपना था बचपन से यही रहा। हर गली मोहल्ला अपना था। सड़कों के अलावा नजरें यहां वहां भी भटक रही थी। बदलते बिहार की नई तस्वीर खोज रही थी आखिर लोगों से काफी कुछ सुना था। चलते ही रास्ते में दुकानों पर भी नज़र पड़ी। यहां बदलाव ज़रुर दिखा। विशाल मेगा मार्ट का आउट लेट बता रहा था कि नए बिहार में मुझे भरोसा है तो वहां उमड़ती भीड़ बता रही थी कि भरोसा बेवजह नहीं है। आगे बढ़ते ही रिबोक के शो रुम पर नज़र पड़ी फिर न जाने कितने ब्रांड के शो रुम दिखे। छोटी-छोटी दुकाने एका एक बड़ी हो गई थी। इनमें कई तो पूरी तरह से बातानुकूलित थी। कहें तो दिल्ली की तर्ज़ पर सजी थी ।जब यहां था तो मिथिला मोटर्स कंपनी को बोरिया बिस्तर लेकर बिहार से भागना पड़ा था। मुख्यमंत्री की बिटिया की शादी में जो गाड़ियों का काफिला निकला था सब इसी शो रुम से निकाले गए थे। कंपनी भी बिहार से निकलना ही बेहतर समझा। वो भू -भाग काफी दिनों से खाली था। बरबस नज़र उधर पड़ी। हीरो होंडा का शो रुम उस जगह पर इठला रहा था। कुछ आगे बढ़ते ही जो देखा, एक बारगी यकीन नहीं हुआ हुंडई और मारुति के शो रुम बता रहे थे की बिहार वाकई बदल रहा है। पर यह तो शुरुआत थी। चलते चलते गाड़ी वाले से पूछा काफी कुछ बदल गया है। उसने बताया कि किस तरह से बदलाव हो रहे हैं। बताते बताते उसकी ऑखों में एक चमक थी। जो बता रही थी बदलाव के बयार भले ही तेज न हो पर सुकून उस तबके तक पहुंचने की कोशिश जरुर कर रहा है जिस तबके से जुड़े होने के लालू प्रसाद दंभ भरते औऱ जात पात के नाम पर गुमराह करते पिछले पन्द्रह सालों में बिहार को गर्त में जनता की मर्जी से डूबोया। मैने उससे पूछा सड़के तो पहले से खराब दिख रही है। ड्रइवर ने बताया, भैया काम तो गांवो में हो रहा है, हर गली की सड़के चकमका रही है या चकमकाने को तैयार है ।शहर की सड़के भी अच्छी थी पर बारिश ने बेहाल कर दिया। लगे हाथ उसने सबाल भी दाग दिया। क्या दिल्ली मे बारिश के समय सड़के खराब नहीं होती मै भी वहां रहा हूं। मै जिज्ञसा बस पूछ बैठा फिर वापस क्यो आ गए। जवाब मिला ऑटो खरीद कर चलाता हूं। खाने पीने के आसानी से निकल आते है। घर पर कुछ माल जाल भी हैं उनकी भी देख भाल हो जाती है। यह सुनकर अपने आप से सवाल कर बैठा क्या बाकई में मैं उस बिहार में ही हूं ,जहां लोग दिल्ली और पंजाब जाने वाली रेलगाड़ियों में ठूंस कर भरे जाते है। खैर सवाल जेहन में ही रहा ।

1 टिप्पणी:

Michal ने कहा…

achhi koshish hai santosh bhai....Gud Luck...Will wait for next one...